00:00फिर वही खबर दो साल का रिष्टा एक हफ़ते की साजिश पत्नी और प्रेमी पर पती की हत्या का आरोग
00:30आप खास विशिष्ट केसेज न समझें वो हमारी व्यापक सामाजिक रुग्णता के लक्षण भर हैं
00:41समाज के पूरे शरीर में गंदगी फैली हुई है वो गंदगी बस प्रकट कहीं कहीं हो जाती है
00:47रिष्टों की एक ही स्वस्थ बुनियाद हो सकती है वो है प्रेम
00:53प्रेम के नाम पे हम बस पशुता जानते हैं क्योंकि प्रेम तो अध्यात्मी की होता है
00:59अध्यात्म से हमारा कोई लेना देना नहीं और प्रेम ऐसी चीज तो है नहीं कि मा की पोग से लेके
01:04पैदा होगे
01:04प्रेम तो सीखना पड़ता है प्रेम कभी सीखा नहीं