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🌶️ کنری تحصیل سندھ — سرخ مرچ کا دارالحکومت | تاریخ، ثقافت اور زراعت کی منفرد داستان

پاکستان کے صوبہ سندھ کے ضلع عمرکوٹ میں واقع کنری تحصیل اپنی سرخ مرچ کی پیداوار کے باعث دنیا بھر میں ایک منفرد پہچان رکھتی ہے۔ کنری کو سرخ مرچ کا دارالحکومت بھی کہا جاتا ہے، جہاں زراعت نہ صرف مقامی معیشت بلکہ پاکستان کی مجموعی اقتصادی ترقی میں بھی اہم کردار ادا کرتی ہے۔

اس خصوصی ویڈیو میں دیکھیے کنری کی تاریخی اہمیت، آبادی، متنوع ثقافتی پس منظر، مذہبی ہم آہنگی اور مقامی لوگوں کی زندگی کے مختلف رنگ۔

🌶️ کنری میں سرخ مرچ کی کاشت اور پیداوار
🌾 زراعت پر مبنی معیشت اور کسانوں کی محنت
💰 مرچ کی کاشت کی لاگت، منافع اور کاروباری اہمیت
🏛️ کنری کی تاریخ اور ثقافتی ورثہ
🤝 مختلف مذاہب کے ماننے والوں کے درمیان بھائی چارہ
🏥 مقامی بنیادی ڈھانچہ، طبی سہولیات اور سماجی خدمات
📍 عمرکوٹ سندھ کے اس منفرد علاقے کی حقیقی تصویر

کنری کی سرزمین، کسانوں کی محنت اور سرخ مرچ کی خوشبو سے جڑی اس دلچسپ داستان کو دیکھیے Apna TV New York کے ساتھ۔

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00:10खुशाम दीद
00:10आज के इस मालुमाती जाइजे में हम एक ऐसी छुपीवी आलमी जराई ताकत की सेर करेंगे
00:15जो बजाहिर तो हमारी नजरों से ओजल रहती है
00:18लेकिन इसका असर पूरी दुनिया पर है
00:20जरा सोचिए एक ऐसी जगा जिसने अपनी मट्टी की रंगत को ही एक आलमी पहचान बना लिया है
00:25और दुनिया भर के खानों में अपना मुनफरिद जाइका शामिल किया है
00:28तो क्या गभी ये सवाल जहन में आया है
00:31कि एजिया की सबसे बड़ी लाल मिर्च की मार्किट आखिर कहा है
00:35इसका जवाब एक इंतहाई सादा और छोटे से कजबे में चुपाए
00:39एक ऐसा कजबा जो बजाहिर तो बिलकुल आमसा नज़र आता है
00:42लेकिन सच तो ये है कि इस वक्त ये पूरी दुनिया की मसालों की मार्किट को चला रहा है
00:47हैरान को ने ना
00:48इस मालूमादी सफर के पांच एहम हिस्सें
00:51पहला एशिया का सुर्ख मिर्चों का दारुल हकूमत
00:54दूसरा सदियों पर महीत उसकी पोशीदा तारीख
00:57तीसरा अकायत का हसीन इम्तजाच
01:00चौथा मसालों की मौाशियाद
01:02और आखिर में बात करेंगे मस्तक्बिल को दरपेश चालेंजस पर
01:05तो फिर आईए पहले इसे की तरफ बढ़ते हैं
01:09हिस्सा एक एशिया का सुर्ख मिर्चों का दारुल हकूमत
01:12यानी कुन्री की मसालों की सल्तनत का हैरान कुन पे माना
01:16सुबस इनके एक छोटे से तहसील टाउन ने जरात के मैदान में
01:19ऐसी बुलंदियों को छुआ है
01:20जिसकी मिसाल मिलना वाकी मुश्किल है
01:22जिला उमर कोड का ये सादा सा कस्वा
01:24इतनी बड़ी जरे बाला दस्ती आखिर कैसे हासिल कर चुका है
01:28पचासी फीसद?
01:29जी हाँ, ये कोई आम सा नंबर बिलकुल नहीं है
01:32पूरे पाकिस्तान में पैदा होने वाली कुल लाल मिर्च का पचासी फीसद इसा
01:36सिर्फ और सिर्फ इसी एक तहसील यानि कुन्री से आता है
01:39जरा तसवर करें, एक अकेली जगा पूरे मुल्की जरे पैदावार का इतना बड़ा हिस्सा फराम कर रही है
01:45अब सवाल ये पैदा होता है कि आखिर यहां की पैदावार में ऐसी क्या खास बात है
01:49खिर इसकी सबसे बड़ी वज़ा है डंडी कट मिर्च
01:52ये एक खास गोल शकल की लाल मिर्च है जो अपने मुन्फरिज जाइके की वज़ा से पूरी दुनिया और खास
01:58तोर पर अरब और यूर्पी मार्केटों में बेहद पसंद की जाती है
02:01और हाँ आजकल इसके साथ साथ एक लंबी हाइब्रिड मिच भी यहां काफी कसरत से हुगाई जाने लगी है
02:07इस मार्केट के फैलाओ और मौशी एहमियंत का अंदाजा जरा इन आदादों शुमार से लगाई है
02:11हर साल एक लाग से सवा लाग मेट्रिक टन की पैदावार
02:15और जब सीजन अपने उलूच पर होता है न तो रोजाना पंदरा से बीस हजार भोरियों की तरसील होती है
02:20और सबसे एहम बात ये है कि इस पूरी कम्यूनिटी के पंदरा हजार किसान खांदानों की रोजी रोटी मुकमल तोर
02:26पर इसी एक फसल से जुड़ी हुई है
02:28अब चलते हैं हिस्सा दो की जानिब
02:30सदियों पर मुहीत पोशीदा तारीख
02:32मुगल शेंशाओं से लेकर रेलवे के खंडरात तक
02:35जिला उमर कोट की इस शांदार जरे काम्याबी के पीछे दरसल एक बहुत गहरी तारीख चुपी है
02:40आईए जरा माजी के जहरोकों में जहांकर इस कजबे के इर्थका को समझने की कोशिश करते हैं
02:45इस इलाके की कहानी शुरू होती है 1226 में सोड़ा खांदान की हुक्मरानी से फिर 1542 में बिलकुल ये वही
02:52जगा है जहां मुस्तक्बिल के मुगल बाच्चा अकबर की पैदाईश हुई
02:54इसके बाद 1935 में कुनरी का रेलवे स्टेशन तामीर हुआ
02:58लेकिन सबसे दिल्चस्प मुड़ता बाया जब 1960 में राधा राम से मिर्च के बीजी हाल आये गए
03:04और बस फिर ये कदीम तारीखी जमीन एक जदीन जरही मरकज में तबदील हो गई
03:09लेकिन एक तरफ जहां जरात आसमान की बुलंदियों को चू रही है
03:12वहीं बुन्यादी धांचे का हाल बिलकुल मुक्तलिफ है
03:14जरा इस तस्वीर को देखिए
03:161935 में बनने वाला कनरी का रेलवे स्टेशन जो 1996 तक इस इलाके की लाइफ लाइफ लाइन था
03:22आज एक लावारिस खंडर बन चुका है
03:24इसकी पठड़ियां दा कुखड चुकी है
03:26ये आज की फलती फूलती मार्केट और तबाह हाल इंफ्रस्ट्रक्चर का एक इंतहाई वाज़े और हैरान कुन मवाजना है
03:38देखिए कोई भी जगा सिर्फ फसलों और इमारतों से नहीं बनती
03:42बलके वो बनती है वहां बसने वाले लोगों से
03:44और किन्री का ये माशरती ताना बाना वाकई इंतहाई मुनफरिद और खुबसूरत है
03:49अब जरा इन आदादों शुमार पर गोर करें
03:51आबादियाती लिहाज से एक इंतहाई दिल्चस्प हकीकत ये है
03:54कि पाकिस्तान जैसे मुस्लिम अक्सरियती मुलक में कनरी एक हिंदू अक्सरियती लागा है
03:59यहां तक्रीबन 56 फीसद हिंदू और 42 फीसद मुसल्मान आवाद हैं
04:03यह महद नंबर्स नहीं है
04:04बलके यह एक ऐसी शांदार कम्यूनिटी की निशानदा ही करते हैं
04:07जो अपने बैनलमजाहिब इत्तिहात के लिए पूरे मुलक में जानी जाती है
04:10एक मकामी रहाइशी का ये जुमला इन तमाम शुमारियात को एक जीती जागती इनसानी शकल दी देता है
04:16कि शहर चोटा जरूर है लेकिन यहां के लोग बहुत खुबसूरत है
04:20अगर आप यहां के बाजारों के रुख करें तो आपको रिवायती चूड़िया नज़र आएंगी
04:24जो हिंदू खवातीन बनाती भी हैं और सकाफत के तौर पर पहनती भी हैं
04:27यह लोग रोजमर्रा के दुख सुख में एक दूसरे का बिलकुल एक खंदान की तरह साथ देते हैं
04:33इस हमाहंगी की एक और बेहतरीन मिसाल कुन्री क्रिस्चिन अस्पताल है
04:37मालू मैं यह अस्पताल कभी एक चलता फिरता मुबाइल कारवा हुआ करता था
04:41पिर 1975 में इसने कुन्री में अपना मुस्तकिल ठिकाना बना लिया
04:45और आज आज ये इस मतनवो कम्यूनिटी और थर के वसी सहराई इलागों के लिए
04:50सहत और आंकों के इलाज की एक इंतहाई एहम और बन्यादी जरूरत बन चुका है
04:54हिस्सा चार मसालों की मौशियात
04:57सुर्ख सोना उगाने के कारोबार का जाइजा
04:59अच्छा तो अब जरा माइक्रो एकनॉमिक्स की तरफ आते हैं
05:02और देखते हैं के इन किसान खादानों के लिए ये पूरा कारोबारी पहिया आखिर गूमता कैसे है
05:08खेट से मार्केट तक का इस सफर कोई आसान काम नहीं है
05:11ये इनतहाई मेहनत अलाव है
05:12ताजा फसल को चुनना फिर उने बोरियों में भरना धूप में सुखाना
05:16और आखिर में थोक मार्केट के लिए च्छंटी और सफाई करना
05:19इस पूरे कठन अमल में मकामी खवातीन का किरदार इंतहाई एहम होता है
05:23जो फसल की कठाई के बाद की इस मुश्किल तरीन मैनेजमेंट को बहुभी संभालती है
05:28जराई तहकी के आदादो शमार से हमें अखराजात का बहुभी अंदाजा लगा सकते हैं
05:33किसानों को परदार करना पड़ते हैं इस फेरिस पर एक नज़र डालें
05:37बीज, खाद और पानी के अखराजात अपनी जगा लेकिन सबसे बड़ा खर्चा मैनेजमेंट का हैं
05:42जिसमें मजदूरी और सिखाने का आमल शामिल है
05:44ये खाद और दीगर जराई मदाखिल ही हैं जो इस फसल की असल लागत को इतना बढ़ा देते हैं
05:49तो असल मुंदा ये है कि इतनी मेहनत के बाद किसानों को बचता क्या है
05:53फी एकर तकरीबन एक लाग रुपे की कुल लागत की मुकाबले में लगभग एक लाग तेरासी अजार रुपे तक की
05:59आमदनी होती है
06:00और यही वो शांदार मुनाफ़ा है जिसने इस फसल को मकामी मैशत की रीड की अड़ी बना दिया है
06:05बिल्कुल यही वो कशिश है जिसकी वज़े से नसल दर नसल खांदान इस महनत अलब काम से खुशी खुशी जुड़े
06:11हुए है
06:12अब आते हैं अपने आखरी हिस्से की तरफ
06:13हिस्सा पांच मुस्तक्बिल को दरपेश चालेंजिस
06:16मिर्च की फसल और रोजमर्रा की जिन्दगी पर मुडलाते खतरात
06:19जहां एक तरफ हमने इतनी माली काम्याबियों का जिकर किया
06:23वही हमें आज की इंतल खकीकतों और महुलियाती खतरात को भी देखना होगा
06:26जो अब कुंदरी की खुशाली के लिए एक संगीन चैलेंज बनते जा रहे हैं
06:30मौसमियाती तबदीलियों और दबाओ की वज़ा से पिछले सिर्फ 5 सालों में
06:34यहां की पैदावार में 30 से 40 वीसद तक की बड़ी कमी वाके हुई है
06:38मट्टी में फॉस्फोलिस जैसे आहा मनासर की शदीद कमी है
06:41और सबसे बड़ा तजाद देखिए
06:43इतनी बड़ी जर्य पैदावार वाले शहर में पीने के साफ पानी की शदीद किल्लत है
06:48लोग आज भी 20 रुपे फी गैलन के हिसाब से गदागाडियों से पीने का पानी खरीदने पर मजबूर है
06:53और जब हम इन बड़े मौशी आदादों शुमार को एक आम शहरी की रोजमरा जिन्दगी से जोड़ते हैं
06:58तो एक बिलकुल मुख्तरिफ तस्वीरों भरकर सामने आती है
07:01जरा सोचिए जहां मार्केट में करोडों का कारोबार हो रहा है
07:04वहीं एक मकामी मेकैनिक सारा दिन काम करके बमुश्किल डेर सो से दो सो रुपे कमाता है
07:09और तीस बरसों से मेहनत करने वाला पापड फरोश रोजाना बमुश्किल चार से पांच सो रुपे बना पाता है
07:15ये मौशी अदम तवाजन वाकई जिन्दगी की एक इंतहाई सक्थ खीकत है
07:19ये तमाम हकाइक हमें वाकई एक बहुत गहरी सोच में मुपतला कर देते हैं
07:24इस मालूमाती सफर की एक खताम पर जो सबसे एहम सवाल जैनों में गुंचता है
07:28वो ये है कि क्या हमाहंगी और तारीक की एरोशन अलामत
07:31इन बदलते हुए महोलियाती और माशी हालात का काम्यावी से मुकाबला कर पाएगी
07:35या फिर ये सुर्ख सोना भी वक्क की धूल में कहीं गुम हो जाएगा
07:39ये कैसा सवाल है जो यकिनन हम सब को सोचने पर मजबूर कर देता है

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