00:00मिलेंगे ऐसे भी लोग, आप उनके पास चाहिए, वह ऐसे लग misunderstand, तो वेल रेड है वहाई, आप उससे कई
00:05नचिकेता हूँ कहेगा बाइजीद, सब जानता है, नाम वो सारे जानता है, पर जितना उथला पन उसकी समज में नचिकेता
00:16को लेकर के है, उतना ही उथला पन उसकी
00:18समझ में बायजीद को लेकर
00:21इसके बारे में बोलो
00:22हाँ मैं इसके बारे ही बता सकता हूँ
00:23इसके बारे में इसके बारे में भी गहराई कहीं नहीं है
00:26समझ कहीं नहीं है बोध कहीं नहीं है
00:28विस्तार पूरा है
00:30जैसे ये हिंदूों की किताबें पढ़ाते हैं
00:36क्या बात है
00:38तो सही है
00:40वो इसाई की भी किताब पढ़ा देगा
00:42वो सिक्की की भी किताब पढ़ा देगा
00:44लेकिन जो पढ़ा रहा है वो तो गोलमोल है न
00:48वही अग्यान है
00:49जिस अग्यान से वो हिंदू की किताब छूरा
00:52और उसी अज्यान से मुसल्मान की किताब छूरा है
00:55तो किताबों की संख्या बढ़ गई, विविधता बढ़ गई, विस्तार हो गया
01:00पर उस सारा विस्तार हुआ अज्यान की के इंदर से है
01:04हम तुम्हें आओ, बैठो
01:06तालमुद, यहुदियों के गरंथ पढ़ाएंगे, करेंगे चर्चा
01:09आप चर्चा सब गरंथों पर कर लो, पर उस जितनी चर्चा है
01:13फर्क नहीं पढ़ता, गरंथ कौन सा है
01:15एक चीज कायम और साबोत और साजी है, क्या?
01:18वो चर्चा उथली है
01:21कोई एक मुद्दे पर उथली चर्चा करे
01:23और कोई दस मुद्दों पर उथली चर्चा करे
01:25उस्रेष्ट हो गया क्या?
01:28किसी जुग्जी जूपड़ी आले इलागे में जाओ
01:30तो वहां पर कितनी इमारते होती हैं?
01:33बहुत सारी होती है
01:34इतनी मंजिलों की होती है
01:36उन में से पत्तियक इमारत
01:37एक
01:38उचाई कहीं नहीं मिलेगी
01:40विस्तार मिलेगा
01:42बहुत सारी जुग्जीयां मिलेगी
01:44पर जिसको कह सको कि
01:47गगन चुम्बी इमारत है ऐसी
01:49एक भी नहीं मिलेगी