00:00मेरे पिता जी ने लेखा तक गुरू के गुरू ने था किया गुरू को अमर फल भेट
00:04जब वो प्याचिव में थे तो देखते थे कि उनके ये सब लेक्चरेज, प्रोफेसर जाते थे
00:10और बहुत पुराने पुराने नोट्स लेकर गया आते थे
00:13उन्हीं नोट से पढ़ाना शुरू कर देते थे
00:15तो उन्होंने बैटे-बैटे तुकवंदी करी थी बाद में
00:17वो फिर मुझे मिल गई
00:18उन्हें गुरू के गुरू ने था किया
00:20गुरू को अमर फल भेट
00:22तब से गुरू जी कर रहे वही नोट डिक्टेट
00:28केंद्र है, रिशिकेश, हरित्वार है, वारानसी है
00:31बुधगया है, मत्रा ब्रिंदावन है, प्रियाग है
00:35यह सब जगें है, पुडे है, दक्षिण में और जगें है
00:38आप यहाँ चले जाएए, यहाँ पहले से ही इस थापित
00:43धाराएं हैं, परंपराएं हैं, मठ, आश्रम, यह सब चल रहे हैं
00:46आप उनमें जाकर के कहीं शामिल हो जाएए
00:49और दस-बीस साल आप वहां रहें, और दस-बीस साल बाद गुरू जी सिधार जाएंगे
00:54और फिर वहां जितना भी सूक्ष्म और स्थूल जमावड़ा है और संसाधन है और धनराशी है वो किसकी हो जाएगी?
01:05आपकी हो जाएगी
01:06तो इस सबसे आसान तरीका रहा है, किसी पहले से ही बहती आ रही परंपरा में प्रवेश कर जाना
01:13बहुत जाएदा प्रयास करना पड़ता है, घुसोगे तो गुरू जी कुछ महनत कराएंगे, कहेंगे ये करो वो करो चलो बच्चा
01:19सफाई करो ये करो
01:20जो भी वो आदेश देंगे इसका पालन करना पड़ेगा, लेकिन कोई मौलिक प्रयास नहीं करना पड़ेगा
01:25प्रयास भी क्या करना है वो गुरू जी बता देंगे, और गुरू जी को भी कोई मौलिक निर्देश नहीं देना
01:32है, ना आपको कोई मौलिक प्रयास करना है, ना गुरू जी को कोई मौलिक निर्देश देना है, गुरू जी भी
01:38आपसे वही सब कराएंगे जो उनसे, उनके
01:44गुरू के गुरू ने था किया गुरू को अमर फल भेट तब से गुरू जी कर रहे वही नोट डिक्टेट
01:53परंपरा से संबंधित होने का यह सबसे प्रचलित और सबसे सस्ता दरीका है लेकिन गजब की बात यह कि लोगधर्म
02:00में यह सबसे सम्मानिय तरीका है
02:02कि देखो तुम्हें पता भी है हम अब किस आश्रम से संबंधित हैं हम किस परंपरा से हैं अच्छा अच्छा
02:07आप उस परंपरा थे नमस्कार नहीं तो तुमने क्या किया है और आपका अनुभाव होगा कि मुझ पर आक्षे भी
02:12सबसे आदा यही लगते हैं कि बताओ गुरू
02:14कौन इनका गुरू दीख्छा किस ने दी परंपरा क्या इनकी और उस सबसे सस्ता गाम है बात पुछा रही है
02:20समझ में