00:00गीता उपनिशत सब बेकार है, मत पढ़ो इनको
00:05तुम उन गरंथों को तुरिस्कृत करवा रहे हो
00:08जिन गरंथों को आज तक सम्मान मिला ही नहीं
00:12और सम्मान माने यह नहीं होता कि घर में ले जाकर मंदिर में गीता रख दिये
00:15दुरंत के प्रति तो यही सम्मान होता है
00:17कि उसे ध्यान दे समझो
00:18जो पढ़ा ही नहीं गया है तुम कह रहे हो इसको आगे पढ़ना मत
00:21absurd बात है
00:23आगे पढ़ना मत पीछे भी कब पढ़ाता है
00:26I reject everything
00:27standing from
00:29my high pedestal
00:31I reject everything
00:32और आप उसको देखोगे और आप भी कहोगे
00:45इन में एक चीज अनिवारे रूप से गायब होती है gratitude
00:50तुम पढ़ा नहीं पाए सीख तुम कुछ पाए नहीं और जो उन्होंने तुमें गरंथ पढ़ाए उन गरंथों में ही दोश
00:55है
00:56कम से कम दूर जाना था तो चुपचाप प्रणाम करके चले जाते
01:00यह बवाल करके क्या जा रहे हूँ रितक्यता जैसी कोई चीज नहीं कुछ दो-चार प्रतिश्यत जो तुम्हारा ज्यान है
01:07चुपचाप आया वो भी तो उन्हीं गरंथों से है पर कृतक्यता ना तुम्हें गुरू के प्रति ना गरंथ के प्रति
01:16बनना है ऐसा यह यह यह
01:20हुआ हुआ हुआ है