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पूरा वीडियो: गलत जगह फँसे हुए हो तो हटते क्यों नहीं? || आचार्य प्रशांत (2025)
लिंक: https://youtu.be/3W1u0GbWKI8?si=surai47vB47KlMH7
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ज़रा महसूस करिए कि आज़ाद हवा में साँस लेकर फेफड़े कैसा अनुभव करते हैं। जीवन का एक स्तर होना चाहिए, उसकी गुणवत्ता होनी चाहिए। लेकिन हमें सिखाया जाता है कि जैसे सब जी रहे हैं, वैसे ही जियो। ज़हरीली हवा, मटमैला पानी, गड्ढों वाली सड़कें और बदतमीज़ी को जीवन का हिस्सा मानकर सहते रहो। Quality of Life माँगना कोई बेकार की बात नहीं है। ज़रूरत ऐसे लोगों की है जो खुलकर कह सकें कि तुम सबने झेला है, लेकिन मुझे नहीं झेलना। जो ठीक नहीं है, उसे क्यों सहें हम?
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वीडियो जानकारी: 14.08.2025, बोध प्रत्यूषा सत्र, गोवा

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Transcript
00:25आपको पूरी तरह से निचोड़ लेगी
00:28जीवन आपका सोख लेगी बिलकुल ये
00:31हमें बताया गे है ना कि
00:32साधा जीवन उच्छ विचार
00:34हमारी मा ऐसे रही हमारे बाप ऐसे ही रही है
00:36हमारे चचेताउ सब ऐसे ही रह रहे है
00:39जीवन का एक स्तर होना चाहिए
00:40गुड़वत्ता होनी चाहिए
00:41quality of life मांग रहे हो, क्या बात हैं, बेकार की बात हैं, कुछ नहीं होती quality of life,
00:45कैसे सब जी रहे हो, जहरीली, हवा, मटमेला पानी, गड़ों वाली सडकें,
00:49मत्तमीज लोग, जेलो इनको, क्योंकि यही तो जीवन है, और अगर ऐसे नहीं हो ना,
00:53तो सबसे पहले अपने बचने का इंतजाम कर लो, मैं बहुत-बहुत सारे लोग चाहिए,
00:58जो जोर से कह दे नहीं, तुम सब ने जेला है, मुझे नहीं जेलना,
01:02अरे जो ठीक नहीं है, उसको क्यों सहे हम,

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