00:00ये चो चलता है ना कि पत्निया पती का नाम नहीं लेती हैं ये मालूम है सच मुच आया कहां
00:05से है
00:06ऐसों से बचो जो कहते हैं कि हमारी तो गोद में है हमने छू लिया या हम जानते हैं कि
00:13भगवान क्या सोच रहे हैं
00:15जिसका वास्तव में सत्य से हारदिक नाता होगा
00:19पहली चीज उसके आत यह होगी कि नाम लेने में उसकी जबान कापेगी
00:26बोला नहीं जाएगा
00:28कैसे बोल दूँ गुस्ताखी हो जाएगी
00:32नाम नहीं ले पाएंगे
00:34नाम नहीं ले पाएंगे
00:36हम तुम्हारा नाम नहीं ले पाएंगे
00:39अब लोगधर्म के विकृतियां देखो ना, यह चलता है ना कि अभी भी है, बहुत सारे घरों में है और
00:46छोटे शहरों में, गाओं में जाता है कि पत्निया पती का नाम नहीं लेती है, यह मालू में सचमुच आया
00:53कहां से है, वो यहां से आया है,
00:57कि अगर वो सचमुच जो स्वामी होता है, वो नहीं जुन्नूलाल नहीं है, उसकी बात नहीं हो रही है, जो
01:05वास्तव में स्वामी है, जो नात है, उसका नाम नहीं लिया जाता, यह रिष्टे की मर्यादा है, वहारा नाम लेंगे
01:15तो रिष्टे में खोटा जाएगी,
01:20अब वो मर्यादा लागू होनी चाहिए थी
01:26अहंकार और सत्य के रिष्टे में
01:29लोगधर्म ने वो मर्यादा इठागर गर कहां चला दी
01:35पहली बाद उसका नाम कर दिया पती
01:37उपति मान नहीं होता है
01:39नाथ स्वामी मालिक
01:41तो उसका नाम स्वामी कर दो
01:43तो उस स्वामी के लिए फिर जितनी मर्यादाएं होती है वो इस स्वामी पर भी चलेंगी
01:49उस स्वामी का नाम नहीं ले जा सकता तो इसका भी नहीं ले जाएगा
01:52उस स्वामी का तो नाम तुम दिन रात लेते हो और हर तरीके से लेते हो
01:57बलकि उसके और नाम नए नए गड़ते रहते हो
02:01और घर में जो खेनी बाज बैठा उसका नाम नहीं ले सकते है
02:06पर नाम न लेने के पीछे भी जो सबब है वो समझना
02:13होता है ऐसा ये प्रेम की बात है