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पद्म पुराण के अध्याय 31 के इस रोमांचक एपिसोड में देखिए कैसे रावण के पुत्र मेघनाद (इंद्रजीत) ने अपनी मायावी शक्तियों और अजेय ब्रह्मास्त्र से राम और लक्ष्मण समेत पूरी वानर सेना को नागपाश में जकड़ लिया। क्या देवर्षि नारद और गरुड़ के आगमन से टूटेगा यह घातक जाल? जानने के लिए देखिए पद्म पुराण की यह गाथा।
Transcript
00:00युद्ध भूमी में जहां कुम्भकर्ण के रक्ट से धर्ती अब भी लाल थी, वानर सेना मेघनाद के अप्रत्याशित अद्रिश्य आक्रमन
00:08के लिए पूर्णतह अन्भिग्य थी, तभी आकाश से विशैले और अगनिवर्षा वाले बानों की बौचार शुरू हुई.
00:16सुदूर वैकुंठ लोक में, शीरसागर पर शेशनाग की शयापर विराजे भगवान विश्नु और उनके साथ बैठे चतुरमुखी ब्रहमा इस अद्रिश्य
00:26युद्ध के विध्वनसक आरंभ को अत्यंत गंभीरता से देख रहे थे.
00:31अचानक अनेको वानर सैनिक विश्बुझे बानों से आहत होकर चीखते हुए धर्ती पर गिर पड़े, उनके शरीर क्षन भर में
00:39जलने लगे और विश्के प्रभाव से नीले पड़ गए, जिससे सेना में तीवर व्याकुलता और भय फैल गया.
00:47आकाश जो अब मेघनाद की माया से और भी गहन अंधकार मैं हो चुका था, असंख्य चमकते हुए बानों की
00:54वर्षा से ऐसे प्रतीत हो रहा था मानों सहसरों उलकापिंद धर्ती की ओर तीवर गती से आ रहे हो, जो
01:01केवल मृत्यु का संकेत थे.
01:04जैसे ही बानों की वर्षा तेज हुई, वानर सेना में भयावा भगदर मच गई, सैनिक चारों दिशाओं में भागने लगे,
01:12लेकिन अद्रिश शत्रु से बचपाना असंभव सा प्रतीत हो रहा था.
01:17रिशी नारद जो अपने तेजस्वी वीना के साथ वैकुंठ में उपस्थित थे, वानरों की दुर्गशा देखकर व्याकुल हो उठे और
01:26उन्होंने भगवान विश्णु से इस मायावी युद्ध का अंत करने की प्रार्थना की.
01:32हर एक गिर्ते वानर सैनिक की चीख रनभूमी में और भी भयावता घोल रही थी, और धर्ती जो पहले ही
01:39रक्ट से सनी थी, अब जलते हुए विश के प्रभाव से काली पड़ रही थी.
01:45एक तीक्षन विशैला बान जमीम पर गिरा, उससे हरेनीले रंग का विशैला धुआ उठता हुआ दिखाई दिया, जो भय और
01:53अद्रिश शत्रू की घातक शक्ती का प्रतीक था, जिससे वानर सेना में दहशत और भी बढ़ गई.
02:00इस विकट स्थिती को भाम पते हुए, भगवान राम और लक्षमन अपने तेजस्वी दिव्य धनुशलिये रंभूमी में आगे बढ़े, जहां
02:09वे अपनी सेना को संभलने का आदेश देते हुए अद्रिश शत्रू का पता लगाने का प्रयास कर रहे थे.
02:16कैलाश परवत पर भगवान शिव अपनी गेहन समाधी से विचलित होकर अपनी तीसरी आख में इस भयानक युद्ध का द्रिश
02:25देख रहे थे, उनका मुख गंभीर और चिंताग्रस्ट था.
02:29राम और लक्षमन अद्रिश बानों से वानरों की रक्षा करते हुए अपनी तीवर बान वर्षा से आकाश को भेदने का
02:37प्रयास कर रहे थे, किन्तु मेघनाद की माया उन्हें लक्ष निर्धारन से वन्चित कर रही थी.
02:44उनके दिव्य धनुषों से निकलते बान हवा में अद्रिश बाधाओं से टक्रा कर बिखर रहे थे, मानो कोई अद्रिश धाल
02:52मेघनाद को सुरक्षा दे रही हो, जिससे रामलक्षमन की शक्ती भी बैसर लग रही थी.
02:58अद्रिश मेघनाद, जिसने माया से अपने आप को बादलों में छिपा रखा था, अब ब्रहमास्त्र को आहवान कर रहा था,
03:06जिससे आकाश में एक भयंकर उर्जा का चक्रवात उमड पड़ा, जो आने वाले महाविनाश का संकेत था.
03:15भगवान ब्रहमा, जिन्होंने स्वयम ब्रहमास्त्र प्रदान किया था, वैकुंट में इस भयानक शक्ती के युद्ध में दुरुप्योग को देखकर चिन्तित
03:23हो उठे, उनके मुख पर गहन निराशा जहलक रही थी.
03:28रणभूमी में, राम और लक्षमन ने वायुमंडल में एक अभूत पूर्व शक्ती का अनुभव किया, एक ऐसी उर्जा जो समस्त
03:36वातावर्ण को स्तब्ध कर रही थी, और वे आने वाले भयंकर प्रहार के लिए तयार हो गए.
03:43मेघनाद के अद्रिश्य हाथों में, ब्रहमास्त्र ने एक विशाल, चमकते हुए नाग का रूप ले लिया था, जो प्रचंड उर्जा
03:51से फन फैलाए हुए रणभूमी पर प्रहार करने को ततपर था, इसकी शक्ती अकलपनिय थी.
03:58अद्रिश मेघनाद द्वारा छोड़ा गया, वह ब्रहमास्त्र, अब एक विशाल सर्प की भांती, आकाश से तीवर गती से राम और
04:06लक्षमन की ओर जप्ता, जिसने क्षन भर में पूरी रणभूमी को भयभीत कर दिया.
04:12जैसे ही नादपाश के रूप में ब्रहमास्त्र राम और लक्षमन की ओर बढ़ा, वैकुंट, कैलाश और समस्त लोकों में देवताओं
04:20के चहरे पर चिंता और आतंग की लहर दोड़ गई.
04:25ब्रहमास्त्र ने राम और लक्षमन को नादपाश में कैद कर लिया, हजारों विशैले नागों ने उनके शरीर को कसकर जकड
04:32लिया, जिससे वे अचेत होकर भूमी पर गिर पड़े.
04:37अपने प्रियनेताओं को इस प्रकार नागपाश में बंधा देखकर वानर सेना में हाहाकार मच गया, आकाश अब भी अंधकार में
04:45और ओमिनस था, मानो विजै का एक काला साया रनभूमी पर मंदरा रहा हो.
04:52रनभूमी की इस भीशन स्थिती में वानर राज सुग्रीव और महाबली अंगद ने अदिश्य शत्रू की खोज में आगे बढ़ने
04:59का निर्णय लिया.
05:01देवलोक में बैठे देवराज, इंद्र और अन्य देवता इस भयानक अंधकार और रामलक्षमन की स्थिती को देखकर चिंतित मुद्रा में
05:10विचार कर रहे थे.
05:12अंगद ने अपनी शक्तिशाली गदा को संभालते हुए उस घने मायावी कुहासे को अपनी उर्जा से चीरने का असफल प्रयास
05:20किया.
05:21चारों और फैली यह रहस्यमई धुंध किसी नागराज के विशैले श्वास की भानती संपूर्ण शिविर को अपने आगोश में ले
05:29चुकी थी.
05:31वानर सेना के वीर योध्धा नील और नल अपने साथियों को इस संकट से उबारने के लिए सेना के मध्यभाग
05:38में दोड़ पड़े.
05:40महर्शी नारद वीना बजाना रोक कर ब्रहमांडिय लोक से इस महा संकट को अत्यंत गंभीर भाव से देख रहे थे.
05:49सुग्रीव ने अपनी वानर सेना को अनुशासन में रहने और अद्रिश्य शत्रु के प्रहार से बचने के लिए सतर्क रहने
05:56का संकेत दिया.
05:58आकाश में तैरता हुआ वह काला कुहासा धीरे धीरे एक विशाल मायावी चक्रवियू का रूप धारन करता जा रहा था.
06:07समूचे शिविर में हाहाकार मचा हुआ था क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस अद्रिश्य विपत्ती का
06:14सामना कैसे किया जाए.
06:17भगवान विश्नु अपने परमधाम वैकुंठ में इस लीला को देखकर अपनी गहरी और असीम द्रिश्टी से सब कुछ ताड़ गए.
06:26अंगद ने अपनी विशाल भुजाओं से हवा में प्रहार किया ताकि कुहासे के पीछे छुपे किसी भी मायावी का पता
06:33लगाया जा सके.
06:35युद्ध भूमी की इस धुंध में न्याय और अधर्म के बीच का यह संधर्ष एक अत्यंत रहस्य में मोड ले
06:42चुका था.
06:44वानर सेनाप्ती जामबवान ने अपनी वृद्धावस्था और अनुभव का परिचय देते हुए सभी को धैर्य रखने का उपदेश दिया.
06:53कैलाश परवत पर भगवान शिव अपनी तीसरी आख के हलके से कमपन से इस मायावी प्रपंच को ताड़ गए.
07:01मेघनाद की इस माया के प्रभाव से वानर सेना के शूरवीर योध्धाओं की द्रिष्टियां भी भ्रमित होने लगी थी.
07:09रन्भूमी पर चाया वह कुहासा अब धीरे धीरे और अधिक घनी भूत होकर एक अद्रिश कारागार की भानती प्रतीत होने
07:18लगा.
07:19सुग्रीव और अंगर ने अपनी सेना को धांधस बंधाते हुए उस कुहासे के उदगम स्थल की और आगे बढ़ने का
07:27आहवान किया.
07:29देवलोक में गंधर्व और अपसराए भी इस अद्रिश संकट के परिनाम को लेकर अत्यंत भयभीट और स्तब्ध थी.
07:37मेघनाद अपनी इस मायावी सफलता से अजे महसूस करते हुए आकाश में ही कहीं अट्टाहास कर रहा था.
07:45वानर सेना के चारों और बिछा यह मायाजाल अब युद्ध के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य बनने की और अग्रसर
07:53था.
07:54क्रोध से तम्तमाय सूर्यपुत्र लक्षमन ने इस अद्रिश्य प्रहार के प्रतिकार हेतु आगे बढ़कर अपने दिव्य धनुष की प्रत्यंचा पर
08:03हाथ रखा.
08:05भगवान श्रीराम ने अपने छोटे भाई के इस उग्रसंकल्प को देखकर एक शांत और गंभीर समर्थन की द्रिश्टी से उन्हें
08:13देखा.
08:14लक्षमन ने अपनी तरजनी के स्पर्ष से एक विशेश प्रकाश बाण का संधान किया जो सीधे अंधकार को चीरने के
08:22लिए था.
08:24संपूर्ण आकाश में उस एक बाण के प्रभाव से विद्युत जैसी चमक फैलने लगी और वातावर्ण का अंधकार कांप उठा.
08:33लक्षमन ने अपने उस तीवर बाण को आकाश की ओर छोड़ दिया जो किसी उलकापिंड की भांती गगंचुम्बी बादलों में
08:41समा गया.
08:43देवलोग से रिशिमुनी इस अद्भुत काउंटर अटैक को अत्यंत उठसुकता और रोमाच के साथ तकट की बांध कर देख रहे
08:50थे.
08:52वह प्रकाशमान बान बादलों के बीच पहुँचकर हजारों सूरियों के समान तीवर गती से चमकने लगा और हर कोने को
09:00रोशन कर दिया.
09:02प्रकाश की उस महाव्यापती ने आकाश के छिपे हुए रहसियों को उजागर करना शुरू कर दिया और आकी दिवारें कमजोर
09:10पढ़ने लगी.
09:12मेघनाद जो अब तक पूर्णता अद्रिश्य रहकर प्रहार कर रहा था, इस अचानक हुए प्रकाश से चौक कर अपने स्थान
09:19पर हिल गया.
09:21आकाश में तैरते हुए बादलों के आवर्ण के पीछे छिपे मेघनाद की असपष्ट आकरिती अब उस दिव्य प्रकाश में जलकने
09:29लगी थी.
09:31लक्षमन के उन इल्यूमिनेशन बाणों ने आकाश के हर छिपे कोने को रोशन कर दिया, जिससे शत्रु का छिपना असंभव
09:38हो गया.
09:40युद्ध के इस महत्वपून मोर पर वानर सेना के मुर्जाय चेहरों पर एक नई उम्मीद की चमक लोट आई.
09:48मेघनाद ने जब देखा कि उसका अद्रिश कवच अब तूटने लगा है, तो उसके भीटर का अहमकार क्रोध में बदल
09:56गया.
09:57रावन के पराक्रमी पुत्र ने अपने मायावी अस्त्रों को पुना संगठित करने के लिए तीवर गती से अपनी स्थिती बदली.
10:06लक्षमन की इस अचूक रणनीती ने युद्ध के मैदान का पासा पलट दिया और अद्रिश शत्रु अब प्रत्यक्ष होने को
10:13विवश्थ था.
10:15गगन के पट पर फैली वह सुनहरी रोश्णी अब एक विशाल चक्रव्यूह जैसी प्रतीत हो रही थी जो हर रहस्य
10:22को भेद रही थी.
10:25मेघनाद ने क्रोधित होकर अपनी माया को और अधिक तीवर करते हुए एक नया और भयंकर चक्रवात उत्पन्न किया.
10:34देवराज, इंद्र और अन्य देवता भी इस रोमांचक संधर्ष को अपनी दिव्य द्रिष्टियों से निहारने लगे.
10:41लक्षमन की द्रिष्टी अब पूरी तरह से आकाश में उस छिपे हुए शत्रू की हर एक हरकत पर टिकी हुई
10:48थी.
10:49वह अलौकिक प्रकाश अब इस बात की घोशना कर रहा था कि माया का परदाफाश होने में अब केवल कुछ
10:56ही क्षण शेश हैं.
10:59मेघनाद ने अपनी माया का संवरण करते हुए आकाश में अपने वास्तविक और भयंकर रूप को प्रकट कर दिया.
11:08देवराज इंद्र पर विजय प्राप्त करने का उसका अहकार उसकी विशाल देह और क्रूर मुस्कान में सपश्ट जलक रहा था.
11:16उसका विराट शरीर स्वन आभूशनों और असुर राजसी वस्त्रों से सुसज़ित होकर भय और एश्वर्य का प्रतीक बन गया था.
11:26मेघनाद की इस भयंकर उपस्थिती ने चारों और एक असहनिय और भारी वायुमंडल उत्पन्न कर दिया.
11:34उसने अपनी गर्जना से पूरी रणभूमी को कमपाते हुए राम और लक्षमन को सीधे युध की चुनोती दी.
11:42देवता भी आकाश मार्ग से इस अद्वितिय और आसन्न महा संगराम को अपनी सांसे रोक कर देखने लगे.
11:50मेघनाद ने उफास करते हुए कहा कि साधारन अस्त्रों से उसे हराना इस ब्रहमांड में असंभव है.
11:59उसका वह उफास गूंजता हुआ पूरी सेना के हरिद्यों में चिन्ता की लहर पैदा कर रहा था.
12:06राम और लक्षमन ने अपने शत्रों के इस मायावी अहंकार को पूरी शांत और अडिक द्रिश्टी से देखा.
12:14देव लोग के स्वामी भगवान विश्णू इस द्रिश्य को देख कर ब्रहमांडिय संतुलन के अगले चरण को निहार रहे थे.
12:22मेघनाद ने अपनी तरजनी उठा कर देवताओं को भी उसकी इस अजे शक्ती का स्मरण कराया.
12:30उसकी बाते मानों उस काले आकाश में बिजली की तरहे कड़क रही थी, जो सब को चेताबनी दे रही थी.
12:38रावन का यह पुत्र अपनी माया और विद्या के घमंड में चूर होकर स्वयंको काल से भी उपर समझ रहा
12:45था.
12:46नारद मुनी ने अपने कर में वीना थामे हुए इस आसन्न संकट के गंभीर परिनामों का अनुमान लगाया.
12:55मेघनाद ने अपनी छाती चौड़ी करते हुए वानर सेना को ललकारा कि वे उसके सामने टिक नहीं सकते.
13:02उसकी हर एक हुंकार से वायुमंडल में अद्रिश तरंगे उत्पन हो रही थी, जो सभी को भैभीत कर रही थी.
13:11लक्षमन ने अपने धनुष की प्रत्यंचा को कस्ते हुए इस घमंडी चुनोती का उत्तर देने की तैयारी शुरू कर दी.
13:19समस्त देवगण इस बात से आशंकित थे कि अब यह राक्षस कौन सा भीशन अस्त्र प्रकट करने वाला है.
13:28मेघनाद की मुसकान अब एक घातक और विनाशकारी योजना में बदलती हुई साफ दिखाई दे रही थी.
13:36वह क्षण आचुका था जब माया और सत्य के बीच का यह संघर्ष अपने सबसे भयानक पड़ाव पर प्रवेश करने
13:43वाला था.
13:45मेघनाद ने अपने अजे रत को रोक कर आकाश में शंकनाद किया जिससे पूरी युद्ध भूमी की वायू स्तब्ध हो
13:53गई.
13:54स्वर्गलोक में बैठे समस्त देवता भी इस भयंकर ग्रिश को देखकर कांप उठे और प्रभु विश्नु की ओर देखने लगे.
14:03रावन के इस शक्तिशाली पूत्र ने अपनी तपो भूमी के सभी गुप्त मंत्रों का स्मरण करते हुए अपनी आखे बंद
14:11कर ली.
14:12चारो और ऐसा घंगोर अंधकार छा गया मानो सूर्यदेव ने भी इस अस्त्र के भय से अपने रत के घोडे
14:19रोक लिये हो.
14:21मेघनाद ने अपने तुनीर से एक ऐसा तीर निकाला जो सीधे पितामा ब्रहमा की उर्जा से उतप्रोत था.
14:30नारद मुनी ने वीना रोक कर तीनों लोकों को सचेत किया कि अब सृष्टी पर सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा
14:37है.
14:38वह अस्त्र कोई साधारन तीर नहीं था बलकि ब्रहमांड के स्रिजनकरता ब्रहमा का सर्वोच ब्रहमास्त्र था.
14:47ब्रहमास्त्र के प्रकट होते ही संपूर्ण ब्रहमांड के नक्षत्र अपनी कक्षाओं से विचलित होने लगे
14:54मेघनाद के चहरे पर एक क्रूर विजय की मुस्कान तैर गई और उसने अस्त्र को अपने प्रत्यंचा पर चढ़ा लिया
15:02वानर सेना के महान योध्धा भी इस असहनिय और प्रखर उर्जा के आगे अपनी आखे नहीं खोल पा रहे थे
15:11लक्षमन जी ने आगे बढ़कर इस भीशन संकट को अपनी और आकर्शित करते हुए अपनी गांडीव जैसी धनुष संभाली
15:20यह वहक्षन था जब दो महान शक्तियों का टकराव सीधे ब्रहमांड के नियमों को चुनौती दे रहा था
15:28मेघनाद ने पूरी शक्ती से ब्रहमास्त्र को मुक्त किया जो आसमान को चीरता हुआ प्रलै की गती से आगे बढ़ा
15:37देवराज इंद्र और अन्य देवता अपने विमानों पर खड़े होकर सांस रोक कर इस महाविनाश को देख रहे थे
15:45अस्त्र हवा में तैरते हुए हजारों सर्पों के रूप में विभाजित हो गया जिसने पूरे वातावर्ण को घेर लिया
15:53इन मायावी सर्पों की फुफकार से संपूर्ण युद्ध भूमी में एक कमप कमपी सी दोड़ गई
16:00वह अस्त्र सीधे राम और लक्षमन की ओर जपता जिसकी गती को रोकना असंभव प्रतीत हो रहा था
16:08समस्त वानर सेना भय से चीख उठी जब उन्होंने अपने आराध्य को इन भयंकर सर्पों के बीच घिरा पाया
16:16उन दिव्य सर्पों ने पलक जपकते ही राम और लक्षमन को अपने शक्तिशाली नागपाश में जकड लिया
16:24ब्रहमास्त्र के नागपाश में बंधे दोनों भाईयों के तेज से संपूवन युद्धभूमी एक रहस्यमय सन्नाटे में डूग गई
16:33दब्रहमास्त्र ट्रांस्फोंस इन्टॉ थाउजंस ओफ वेनमस सेलेस्टियल सर्पेंट्स नागपाश
16:45ब्रहमास्त्र ट्रांस्थड़ थाउ़ सेय थाउचंध। डेटलतित् spanning डप्ले थाउडवर नखप्वोंस इन्टॉबं इन्टॉज़ थाउचंग।
16:50नागपाश रपिलिप्ली अपॉरवं फफ वेनमस सेलेस्ज थाइचंग।
17:03Nagpash.
17:05Descending Rapidly Upon the Battle Field to Entrap the Divine Brothers
17:09The Brahmastra Transforms into Thousands of Venomous Celestial Serpents, Nagpash.
17:17Descending Rapidly Upon the Battle Field to Entrap the Divine Brothers
17:22The Brahmastra Transforms into Thousands of Venomous Celestial Serpents, Nagpash.
17:29Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
17:35The Brahmastra transforms into thousands of venomous celestial serpents, Nagpash
17:42Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
17:48The Brahmastra transforms into thousands of venomous celestial serpents, Nagpash
17:55Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
18:00The Brahmastra transforms into thousands of venomous celestial serpents, Nagpash
18:07Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
18:14The Brahmastra transforms into thousands of venomous celestial serpents, Nagpash
18:20Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
18:26The Brahmaastra transforms into thousands of venomous celestial serpents, Nagpash
18:33Descending rapidly upon the battlefield to entrap the Divine Brothers
18:39Brahmaastra से उत्पन्नवे सहसरों विशैले नाग आकाश से सीधे भूमी की ओर गरच्टे हुए उतरने लगे
18:48संपूर्ण ब्रहमांड के नियमों और ब्रहमाजी के वर्दान की मर्यादा का पालन करते हुए भगवान राम ने स्वयन को उन
18:55नागों के बंधन में समर्पित कर दिया
18:58अस्त्र के नियमों का अनादर न हो, इस महासक्य को स्थापित करने है तु मर्यादा पुरुशोत्तम ने तनिक भी विरोध
19:06नहीं किया
19:07दिव्य चेतना और ब्रहमांडिय अनुशासन का यह अध्भुत द्रिश देखकर देवलोग के रिशिमुनी भी स्थभ रह गए
19:15ठीक उसी प्रकार महाबली लक्षमन ने भी अपने भ्राता के मार्ग का अनुसर्ण करते हुए उन नागों के प्रहार को
19:23सहचता से स्विकार किया
19:26शेशनाग के अन्शावतारी लक्षमन ने अपने जेश्ट भ्राता के प्रती समर्पन का एक अनुठा उदाहरन प्रस्तुत किया
19:34वे दिव्य सर्प फुफकारते हुए बिजली की गती से आगे बढ़े और दोनों भाईयों के चारों ओर लिपटते चले गए
19:43नागपाश के इस दिव्यबंधन ने पल भर में सम्पूर्ण रन भूमी को एक अग्रिश्य और अजे उर्जा से घेर लिया
19:52ब्रहमास्त्र की अमोग शक्ती के प्रभाव से राम और लक्षमन दोनों ने धीरे धीरे भूमी की ओर प्रस्थान किया
20:00दैविय नियमों का मान रखने के लिए उन्होंने रन भूमी की धूल पर अपने चरण स्पर्ष किये और नीचे गिर
20:06गए
20:08धूल से अटी हुई उस भूमी पर वे दोनों भाई इस प्रकार लेटे मानो साक्षात योग निद्रा में लीन हो
20:16उनके इस प्रकार धराशाई होने से संपूर्ण वानर सेना में हाहाकार मच गया और शोक की लहर दोड़ गई
20:25आकाश में विजय का जश्न मनाते हुए मेघनाद की मायावी गूंच चारों दिशाओं में गूंज उठी
20:32वानर राज सुग्रीव और अंगद इस अकल्पनिय द्रिश को देखकर हत प्रभ होकर अपनी सुध गुध खो बैठे
20:40नागपाश के अंगिनत फन अब दोनों भाईयों के सिर पर मंडरा रहे थे जो उनकी अटूत पकड़ को और कस
20:47रहे थे
20:49यह वह क्षण था जब धर्म की रक्षा करने वाले स्वय धर्म के बनाए गए पाश में बंधे हुए थे
20:56ब्रहमा जी के अस्त्र की शक्ती ने उस विशाल रनभूमी की उर्जा को पूरी तरह से स्तंभित कर दिया था
21:04संपूर्ण ब्रहमांड में जैसे समय की गती थमसी गई हो और देवता भी इस अनपेक्षित धटना पर मौन हो गए
21:13धरा पर लेटे हुए राम और लक्षमन के चहरे पर एक विचित्र शांती और परम ज्यान का तेज चमक रहा
21:19था
21:21इस प्रकार अपने परम कर्तव्य का पालन करते हुए भगवान ने नागपाश के इस भयंकर बंधन को सहर्ष स्विकार कर
21:29लिया
21:30नागपाश के इस अप्रतिन बंधन में बंधे अपने पुत्रों को देख लंका के आकाश में विजय के बाजे गूंज उठे
21:38रावन के दर्बार में उल्लास का सागर उमड पड़ा जहां सेवकों ने स्वर्ण मुद्राव और पुष्पों की वर्षा की
21:46विजी भव का उद्गोश करते हुए मेगनाद ने अपने पिता रावन के चर्णों में शिश जुकाया
21:54दशानन रावन के दसों मुखों पर गर्व और अटहास की ऐसी लहर दौड गई जिसने तीनों लोकों को कमपा दिया
22:02स्वर्ण लंका की हर गली को सुगंधित पुष्पों और दीपों की मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया
22:09देवलोक में बैठे देवता भी इसक्षन स्थब्ध होकर इस मायावी विजय के परिणाम पर विचार करने लगे
22:17महर्शी नारद ने अपनी वीना के तारों पर एक गंभीर और विचारों तेजक धुन छेड़ दी
22:24लंका के प्राचीरों पर जलती हुई मशालों की रोश्णी ने उत्सव के उल्लास को और अधिक तीवर कर दिया
22:32रावन ने अपने सिनहासन से उठकर मेघनाद को अपनी चाती से लगाया और उसकी पीठ थपत पाई
22:41राजदर्बार में अपसराओं ने सुवन ताल पर थिरकते हुए अपनी प्रसंता का नरित्य प्रस्तुत किया
22:48सेनाप्ती और मंतरीगन रावन के पराकरम और मेघनाद की इस एतिहासिक जीत के गीत गाने लगे
22:56स्वर्णंगरी के उचे शिखरों पर लहराती हुई पताकाएं रावन के अजे होने की घोशना कर रही थी
23:04मंदोदरी ने अपने पुत्र मेघनाद के इस पराकरम को देखा तो उनके मन में एक अग्यात भय ने भी घर
23:10कर लिया
23:12संपूर्ण लंका नगरी में धोलनगाडों की गूँच से पाताल लोग तक कमपन होने लगा
23:19युद्ध भूमी से दूरवानर शिविर में गहरी चिंता और सन्नाटा पसरा हुआ था
23:25रात्री के अंधकार में भी रावन के राज महल के जूमर और मनियों की चमक से दिन जैसा उजाला हो
23:32रहा था
23:33रावन ने उच्चस्वर में अपने दर्बारियों को आदेश दिया कि इस विजय का उच्सव पूरे साथ दिनों तक मनाया जाए
23:42स्वर्णंदरी के द्वारों पर विशाल रंगोली और दीपकों की पंक्तिया उच्सव की भव्यता को द्विगुनित कर रही थी
23:50महान विजय के मद में चूर रावन ने अपने पुत्रों और सेनाप्तियों के साथ स्वर्ण सिनहासन पर बैठ कर मदिरापान
23:58किया
23:58इस प्रकार लंका में विजय का यह भव्य जश्न पूरी रातरी गूंचता रहा जबकी नेती अपने अगले पन्ने को पलटने
24:07की तैयारी कर रही थी
24:10वानर शिविर के भीतर चाई हुई गहरी निराशा के बीच विभीशन और महर्शी जांबवान अपने साथियों को धांधस बंधाने का
24:18प्रयास कर रहे हैं
24:21विभीशन गंभीर और स्थिर स्वर में सभी को समझाते हैं कि देवस्वरूप कभी भी नश्वर बंधनों में सदा के लिए
24:28नहीं बंध सकते
24:30वानर योध्धाओं के चेतनाप्तल पर छाय अंधकार को दूर करने के लिए जामबवान अपने दीर्ग कालिक अनुभवों का स्मरण कराते
24:39हैं
24:41शिवर की उस शांत और गंभीर वायुमंडल में दिव्य सत्यों की गूंच से सैनिकों के मन कापते हुए आत्म विश्वास
24:48को पुनह प्राप्त कर रहे हैं
24:51चारू तरफ फैली उस गेहन व्याकुलता के मध्य सेनापती अंगत भी अपने गुरुजनों के वचनों को ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं
25:01विभीशन की वानी में निहित वह अगाध विश्वास हताश सैनिकों के मस्तक पर पड़ी चिन्ता की रिखाओं को हलका करने
25:08लगा है
25:10बुजुर्ग जामबवान अपने प्रग्या चक्षूओं से भविश्य की अद्रिश्य संभावनाओं का आकलन करते हुए सबको धैर्यधारन करने का आदेश देते
25:19हैं
25:21शिविर के कोने में जलती हुई मशालों की लौरात के सन्नाटे में एक स्थिर और अडिक प्रेणा का संकेत दे
25:28रही है
25:30वानर सेना के वीर सिपाही अपने प्रिय स्वामियों की रक्षा के लिए अंतह करन से अपनी पूरी शक्ती को एकत्र
25:38कर रहे हैं
25:40विभीशन ने लंका की मायावी युक्तियों का परदाफाश करते हुए सभी को सचेत रहने की विशेश चेतावनी दी है
25:49जाम बवान के प्राचीन उपदेशों ने शिविर की शिथिल पड़ी उर्जा को पुनह एक सूत्र में पिरोकर जीवन्त कर दिया
25:56है
25:58रात्री के गहरे आंचल में डूबा यह शिविर किसी अद्रिश परीक्षा के पूर्व की शांत और गंभीर बेला का प्रतीक
26:06बन गया है
26:08वानर शिविर के उस विशाल प्रांगण में हर एक सैनिक के हरिदय में धर्म की विजय का संकल्प पुनह प्रजवलित
26:15हो उठा है
26:27वान की गुझती हुई वानी लंका के आकाश तक अपनी अद्रिश्य गुझ छोड़कर सभी के भीतर साहस भर रही है
26:35शिविर के उपर मंदराती हुई अनिश्चित्ता की धुन्ध अब आत्मबल की अगनी में तबकर शुद्ध हो रही है
26:44समूची वानर वाहिनी अब अपने बुजुर्गों के मार्ग गर्शन में अगले चरण के लिए पूर्णत है तयार खड़ी है
26:52विभीशन का मार्ग गर्शन और जामबवान का अनुभव मिलकर इस संकट काल में सबसे बड़ा कवच बन गए है
27:01सत्य और न्याय की इस धर्मलडाई में हताशा के क्षन धीरे-धीरे एक नई रणनीती में परिवर्तित हो रहे है
27:09इस प्रकार शिविर में शोक का अंधकार छंटने लगा और एक नए प्रभात की प्रतीक्षा में संपूर्ण सेना जागरित हो
27:17गई
27:17अजर्कन अधर्ण सेवारि स्ब्सक्षान शोडने लत्लमदी शोर्ठल जागा बना इसे भर tracked भीन में संपूर्तित हो रदण
27:35भाल्विर श्याइ पर इसे इत्विर सिब्सक्षा तर अपेलोड व बएना बकिन अनठीर से भीर इसे ल इसे
27:47As darkness deepens over the battlefield, subtle cosmic signs begin to appear in the heavens,
27:56hinting at the impending intervention of the king of birds to break.
28:01As darkness deepens over the battlefield, subtle cosmic signs begin to appear in the heavens,
28:10hinting at the impending intervention of the king of birds to break.
28:16as darkness deepens over the battlefield
28:20subtle cosmic signs begin to appear in the heavens
28:25hinting at the impending intervention of the king of birds to break
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28:49subtle cosmic signs begin to appear in the heavens.

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