00:00राजा परीक्षित ने परमश रध्धा से मस्तक जुका कर शुकदेव जी से प्रार्थना की कीवे मांधाता के पश्चात सुर्यवंश में
00:08जन में उन यशस्वी राजाओं की गाथा विस्तार से सुनाएं।
00:12शुकदेव जी ने बताना प्रारंभ किया कि मानधाता के उपरांट उनके पराक्रमी पुत्र पुरुकुट्स ने अयोध्या के स्वर्णिम सिनहासन को
00:21सुशोभित करते हुए प्रजा का धर्म पूर्वक पालन किया
00:24जब पाताल लोक में नागराज को गंधर्वों के अत्याचार से मुक्ती दिलाने की पुकार उठी तब समराट पुरुकुट्स ने भगवान
00:34विश्नु के आदेश का पालन करते हुए पाताल लोक की ओर प्रस्थान किया
00:39अपने अतुलनिय पराक्रम से पुरुकुट्स ने दुष्ट गंधर्वों को परास्त कर नागों के सामराज में पुनह शान्ती और धर्म की
00:47स्थापना की
00:49नागराज ने प्रसन्न होकर अपनी परम सुन्दरी पुत्री नर्मदा का विवाह पुरुकुच के साथ कर दिया, जिससे सूर्यवंश और नागवंश
00:58के मध्य अटूट संबंध स्थापित हुआ
01:01काल चक्र बीटता गया और पुरुकुच के वंश में त्रसत्स्यू और अनर्ने जैसे अनेक महान धर्म पालक राजाओं ने अयोध्या
01:09की पुन्य भूमी पर जन्म लिया
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