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श्रीमद्भागवत पुराण के सीजन 3, एपिसोड 48 में, हम सूर्यवंश के उस महान सम्राट की कथा में प्रवेश करते हैं, जिनका नाम सत्य और धर्म का पर्याय बन गया – राजा हरिश्चंद्र। सौभरि मुनि के वैराग्य के बाद, शुकदेव जी राजा परीक्षित को अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट हरिश्चंद्र की अद्भुत गाथा सुनाते हैं। कैसे महर्षि विश्वामित्र ने उनकी सत्यनिष्ठा की कठोरतम परीक्षा ली, जिसने उन्हें अपना राज-पाट, पत्नी, पुत्र और स्वयं को भी बेचने पर विवश कर दिया? श्मशान भूमि पर एक चांडाल के दास के रूप में, जब पुत्र की मृत्यु हुई और पत्नी को शुल्क चुकाना पड़ा, तब भी हरिश्चंद्र अपने धर्म से विचलित नहीं हुए। यह एपिसोड आपको बताएगा कि कैसे सत्य के मार्ग पर चलकर उन्होंने देवताओं को भी झुकने पर मजबूर कर दिया और अंततः उन्हें क्या फल प्राप्त हुआ। धर्म, त्याग और अटूट सत्यनिष्ठा की यह प्रेरक कहानी आपके जीवन को बदल देगी! #Harishchandra #SatyavadiHarishchandra #BhagavataPurana #Vishvamitra #Dharma #Truth #HinduMythology #Suryavansha #Ayodhya #KingHarishchandra #PauranikKatha #HindiKatha #SpiritualJourney #Thyag #MaharishiVishwamitra #San
Transcript
00:00राजा परीक्षित ने परमश्रधा से मस्तक जुका कर शुकदेव जी से प्रार्थनाकी की वे मांधाता के पश्चात सूर्यवंश में जन्मे
00:08उन यशस्वी राजाओं की गाथा विस्तार से सुनाएं।
00:12शुकदेव जी ने बताना प्रारंभ किया कि मान्धाता के उपरांथ उनके पराक्रमी पुत्र पुरुकुट्स ने अयोध्या के स्वर्णिम सिनहासन को
00:21सुशोभित करते हुए प्रजा का धर्म पूर्वक पालन किया
00:24जब पाताल लोक में नागराज को गंधर्वों के अत्याचार से मुक्ती दिलाने की पुकार उठी तब समराथ पुरुकुट्स ने भगवान
00:34विश्नु के आदेश का पालन करते हुए पाताल लोक की ओर प्रस्थान किया
00:39अपने अतुलनिय पराक्रम से पुरुकुट्स ने दुष्ट गंधर्वों को परास्त कर नागों के सामराज में पुनह शान्ती और धर्म की
00:47स्थापना की
00:49नागराज ने प्रसन्न होकर अपनी परम सुन्दरी पुत्री नर्मदा का विवाह पुरुकुच के साथ कर दिया, जिससे सूर्यवंश और नागवंश
00:58के मध्य अटूट संबंध स्थापित हुआ
01:01काल चक्र बीटता गया और पुरुकुच के वंश में त्रसत्स्यू और अनर्ने जैसे अनेक महान धर्म पालक राजाओं ने अयोध्या
01:09की पुन्य भूमी पर जन्म लिया
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