00:07कहते हैं मुझे भी पीड़ा होती है कि ये पीड़ा असाध्य है छोटी छोटे ही कहां आसानी से भूलती है
00:18जिनके साथ उटना बैठना खाना पीना रहा हो अनन्त पल जिनके साथ गुजारे हो
00:25अगर उनके न रहने पर आपको पीड़ा नहीं होती तो फिर आप इंसान ही नहीं
00:31जो मनुष्य किसी प्रियजन के न रहने पर दो आसू भी न रो पाए वो अध्यात्मिक नहीं है फिर वो
00:39पशो है
00:40तो ये घाव तो बना ही रहेगा जब भर भी जाएगा तो भी उसके निशान बात की रह जाएंगे
00:49उसका बस सार्थक उपयोप कर लो
00:52मौत हमें जो सिखा सकती है वो साधारन जीवन कभी नहीं सिखाएगा
00:59बस सीखने के लिए बहुत देर मत कर दीचिएगा
01:03लोग तो ऐसे भी होते हैं कि शम्शान के बगल से उनकी गाड़ी निकल रही हो तो मूझ खेर लेते
01:09हैं दूसरी ओर
01:10मैंने तो देखा ही नहीं
01:13बहुत समय तक हमने बनाए रखा कि महिलाएं शम्शान जाएंगी ही नहीं
01:19उन्होंने तो देखा ही जो मृत्यों को देख लेता है वो मुक्त हो जाता है