00:00नारी देह में पैदा नहीं हुआ मैं लेकिन कई बार थोड़ा कचोटता है ये इंसान जीता कैसे होगा जब सामने
00:08एक महिला होती है पुरुष होता है न तो मैं निश्पक्ष नहीं रह पाता हूँ
00:13जो टीचर थी जिन सबसे जादा मैंने सीखा है वो जादातर महिलाएं ही थी और मैंने देखा है कि उपद्रवी
00:19कम होती है महिलाएं इधर उधर के फसाद कम करती है तोड़ा फाड़ी कम करती है हिंसा कम करती है
00:26और साफ सुथरी जादा रहती है महिलाओं के प्रति थोड़ी �
00:31सी मुझे चानुब होती रहती है ज्यादा बायासी है एक तरह का और देखता हूं तो विचितर लगता है जीती
00:39कैसे है
00:40हो सकता है ये मेरे पौरुष का हंकार हो लेकिन मुझसे नहीं बरदाश्ट होता है कि थोड़ी भी देर के
00:48लिए जीवन के किसी भी पहलू में कोई आकर मेरे उपर चड़ बैठे कोई धकियाए धंकाए धांस दिखाए ठक जताए
00:58ठेंगा भी नहीं अच्छा लगता है अपनी
01:06सिंदगी अपनी रोटी अपनी गरिमा अपनी खुद्दारी वह चीज होते हैं यह नहीं होते हैं एक आदमी को जीवन भर
01:15के लिए आश्रित बना लो अपाहिज बना लो यह तुम उस महिला से प्यार करते हो किसी की टांग वांग
01:23काट दो किसी के पंक काट दो और बोलो कि म