00:00बंदा वो चाहिए जिसको या तो कुछ नहीं चाहिए
00:03या फिर जो चाहिए वो न मिले तो टूटी जाए
00:08हम टूटते ही जाए
00:09बंदे टूटने मतलब अंकार का टूटना
00:10हम दिलोजान से चाहने के खत्रे उठाते नहीं
00:16और कोई पूछे कि क्यों नहीं पूरे दिल से चाहते
00:18तो कहेंगे क्योंकि वो चीज इस लायक नहीं है
00:21कि उसको पूरे दिल से चाहा जाए
00:22अगर वो इस लायक नहीं है कि पूरे दिल से चाहा जाए
00:25तो छोड़ी दो
00:27ना तो छोड़ते
00:29ना चाहते
00:30तो तुम कर क्या रहे हो
00:31मक्खी
00:35मक्खी
00:36उसको सब कुछ चाहिए और कुछ भी नहीं
00:38बहुत सारी गंदगी पड़ी हो
00:40चीजें पड़ी हो, मिठाई पड़ी हो
00:41गुड़ पड़ा हो, धूल पड़ी हो
00:44मक्खी किसी चीज़ को मना नहीं करती
00:46वो हर जगे उड़ उड़ के बैठती है
00:47हर जगे मुँ मारती है
00:49पर ऐसा होता है क्या कि
00:51इतनी सारी चीज़ें पड़ी थी
00:52उसमें एक बर्फी पड़ी थी
00:53किसी ने बर्फी हटा दी तो मक्खी का दिल तूट गया
00:57बात समझवे आ रही है
00:58कुछ भी ऐसा नहीं है
01:00जो प्रानों से प्यारा है
01:03और कुछ भी ऐसा नहीं है
01:05जो बिलकुल व्यर्थ दिखता है
01:07सब कुछ चाहिए और
01:10जो भी चाहिए और नहीं भी मिला
01:12तो कोई बात नहीं
01:12सुवह फिर अपना ऐसे जार करके
01:14खड़े हो जाएंगे कि देखो कोई नई चीज मिल जाए मूँ मारने को तो बर्फी नहीं तो गुण सही लिट्टी
01:20नहीं तो टटी सही
01:24भाई मख्या आपके पर बैठ जाए तो आप इसलिए तो कहते है उची-ची गंदा हो गया
01:29क्यों कि आपके ऊपर बैठने ते पहले ओखा कहां बैठके आई थी तो हमारे सारे आशे कैसे ही तो हुथ
01:35तो आप
01:36कि ऑश्क० बैठे जहीं असों कुछ भी चलता है कहीं भी मूँ मारेगा
01:43आप मुस्कुरा रही हैं, हम कोई पुरुशों की बात नहीं कर रहे हैं, हम मनुश्य मातर की बात कर रहे
01:47हैं, ऐसे ही हैं, कुछ भी चलेगा, मिटी, टटी, लिटी, सब एक बराबर है, ये नहीं तो, ये नहीं तो,
01:56ये नहीं तो, ये नहीं तो, ये नहीं तो, ये नहीं तो,
02:01झाल झाल