00:00नवरात्री में तो एक-एक सोसाइटी में, गली में, महले में, शॉपिंग मॉल में ऐसा मस्त धमाल चल रहा है
00:06अभी
00:06कि जिन लोगों का धर्म से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं, वो भी धर्मेक हुए जा रहे हैं
00:11दमाल की खातिर, गजब म्यूजेक, गजब पोशाकें, गजब नाच, गजब खाना पीना, यह खाने पीने वाला धर्म, छे-छे महीने
00:20पहले से, महिलाएं तयारी कर रही हैं, वो सीख रही हैं कि डांडिया ऐसे, और यह कौन है जिने धर्म
00:25से कोई मतलब नहीं, पर इने मरोन
00:37निताएं हैं, सबकी कलपनाएं हैं, सबके स्वारत हैं, उसी को धर्म का नाम दे रहे हो, धर्म जो उच्चतम चीज
00:44होना चाहिए था, ऐसा कि इनसान ऐसे देखे तो धर्म दिखाई दे, जिन्दगी की सबसे उची बात, जो हमारी हस्ती
00:51को उचाई दे, धर्म वो चीज होन
00:52चाहिए था ना हमने धर्म को बिलकुल गवारों की चीज़ बना दिया है