00:00रात में जाता हूँ खाने दो बिल्लियान आते हैं
00:02ऐसी नलाइक आरोज जाते हैं
00:05उनको मैं बाकाईदा प्लेट पे रख के देता हूँ खाने को
00:08और वो क्या करती ह起來
00:09मैं प्लेट पे दे रहा हूँ और वो उसको
00:11नीचे गिरा के फिर उसको चाटना शूरू करती है
00:30कि जिन्दगी में खाने के लावा भी कुछ होता है कि गरिमा से ना मिलता हो तो भूखा मर जाना
00:35भी बहता रहे तो ये किसी को कैसे पढ़ाए और हुटल वाले मुझे देखते थे ये रोज लड़ते बिल्लियों से
00:40एक आदमी है जो आधी रात के बाद खाने आ जाता है उसके
00:55दिखा देती हैं कि हम तुम्हारी बात नहीं मानते बाकी बैमान है वो सामने सामने ऐसे दिखाते हैं जैसे हम
01:00सुनने आ गए है कुट्टे को तुम ग्यान दे रहे हो पर उसने तैकर रखा है कि उसको तो हड़ी
01:06चबानी है यैसे किसी की वो भीतरी मूले उस्था बदल दे �
01:10जिसके लिए मैं आपसे कहता हूं कि ओ रभ मेरे मेरा दिल बदल दे उनहीं के लिए बरबादी जिनके लिए
01:19अधा की तरह है कोई वजह नहीं थी कोई सौधा नहीं किया कोई कुर्बानी नहीं दी स्टाइल है हमारी
01:26बरबाद होना जिसकी अदा हो
01:29सताएगा उसे फिर क्या गम जिन्दगी गा